Very Short Moral Story In Hindi – थोड़ी सी बुराई

बुराई कितनी भी छोटी क्यों न हो, उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है, इसलिए बुराई को पूरी तरह छोड़ना ही बेहतर है। इस कहानी (Very Short Moral Story In Hindi – थोड़ी सी बुराई ) में यही बताया गया है।

एक दिन रोहन ने अपने मित्रो को रात्रिभोज पर बुलाया था। वह स्वयं रसोई में खाना बना रहा था। जब खाना उसने चखा तो उसे लगा कि खाने में नमक कम है। लेकिन यह क्या? रसोईघर में भी नमक नहीं था। उसने अपने बेटे से कहा कि जल्दी से थोड़ा नमक खरीद लाओ, लेकिन उसकी सही कीमत चुकाना। न ज्यादा, न कम। बेटा बोला – पिताजी मुझे पता है कि किसी चीज़ का ज्यादा दाम नहीं चुकाना चाहिए, लेकिन अगर मै मोलभाव करके कुछ पैसे बचा सकता हु तो उसमे क्या बुराई है?

रोहन के मित्र पिता – पुत्र कि बाते सुन रहे थे। वे चकित थे कि कम कीमत पर नमक लाने पर गांव कैसे बर्बाद हो सकता है?  जब उन्होंने रोहन से इस बात का रहस्य जानना चाहा तो उसने कहा, कोई भी दुकानदार कम कीमत पर नमक तभी बेचेगा जब उसे पैसे कि सख्त जरुरत होगी। ऐसे में उससे नमक वही खरीदेगा जो नमक को तैयार करने में लगे श्रम और श्रमिकों के संघर्ष से वाकिफ़ नहीं होगा।

मित्र ने पूछा लेकिन इससे गांव कैसे बर्बाद हो सकता है? रोहन बोला, तुम्हे शायद इसका पता न हो, लेकिन शुरुआत में संसार में बुराई बहुत कम थी। आने वाली पीढ़ियों के लोग उसमे अपनी थोड़ी – थोड़ी बुराई मिलाते गए। उन्हें हमेशा यही लगता रहा कि आटे में नमक के बराबर बुराई से संसार का कुछ नहीं बिगड़ेगा, लेकिन देखो बुराई अब कितनी बड़ी हो चुकी है।

जब इतना बड़ा संसार बिगड़ सकता है, तो हमारा छोटा सा गांव क्यों नहीं!

Moral : बुराई कितनी भी छोटी हो, उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है, इसलिए बुराई को पूरी तरह छोड़ना ही बेहतर है।

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